Jaati Jangadna by Dr. Lakshman Yadav

Jaati Jangadna book review in Hindi: जानिए डॉ. लक्ष्मण यादव की पुस्तक जाति जनगणना क्या है, क्यों जरूरी है, लेखक परिचय, मुख्य विचार, सामाजिक न्याय पर प्रभाव और इस किताब से जुड़े सभी महत्वपूर्ण सवालों के जवाब।

भूमिका (Introduction)

भारतीय समाज की जटिल सामाजिक संरचना को समझने के लिए यदि किसी एक विषय ने सबसे अधिक बहस, आंदोलन और राजनीतिक दिशा तय की है, तो वह है जाति। इसी संवेदनशील लेकिन अत्यंत आवश्यक विषय को गहराई, तथ्यों और सामाजिक दृष्टि के साथ प्रस्तुत करती है पुस्तक Jaati Jangadna। यह पुस्तक केवल एक वैचारिक लेखन नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और नीति निर्माण से जुड़ा एक गंभीर दस्तावेज़ है।

 Jaati Jangadna by Dr. Lakshman Yadav
 Jaati Jangadna by Dr. Lakshman Yadav

डॉ. लक्ष्मण यादव की यह कृति पाठक को यह सोचने पर मजबूर करती है कि जब हम “सबका साथ, सबका विकास” की बात करते हैं, तो बिना जातिगत आंकड़ों के यह विकास किस आधार पर मापा जा रहा है?

Table of Contents


पुस्तक का केंद्रीय विषय (Core Theme of the Book)

जाति जनगणना का मूल उद्देश्य है —

  • भारतीय समाज की वास्तविक सामाजिक-आर्थिक स्थिति को सामने लाना

  • नीति निर्धारण में आंकड़ों की भूमिका को समझाना

  • जाति आधारित असमानताओं को केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि डेटा आधारित तरीके से देखने की मांग करना

डॉ. लक्ष्मण यादव यह स्पष्ट करते हैं कि बिना सटीक जातिगत आंकड़ों के न तो सामाजिक न्याय संभव है और न ही संसाधनों का न्यायपूर्ण वितरण


पुस्तक की प्रमुख विशेषताएँ

1. तथ्यों पर आधारित विश्लेषण

यह पुस्तक नारों या राजनीतिक भाषणों तक सीमित नहीं है। इसमें ऐतिहासिक संदर्भ, सरकारी रिपोर्ट्स, सामाजिक सर्वेक्षणों और नीति-निर्माण की कमियों का तार्किक विश्लेषण मिलता है।

2. राजनीति और समाज का संतुलित चित्रण

लेखक न तो किसी एक राजनीतिक दल का पक्ष लेते हैं और न ही किसी विचारधारा का अंध समर्थन करते हैं। वे पाठक को यह समझाने का प्रयास करते हैं कि जाति जनगणना कोई दलगत मुद्दा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक आवश्यकता है

3. आम भाषा में गहन विचार

पुस्तक की भाषा सरल, प्रवाहपूर्ण और आम पाठक के लिए सुलभ है। गंभीर सामाजिक मुद्दों को भी लेखक ने ऐसे प्रस्तुत किया है कि गैर-अकादमिक पाठक भी सहजता से समझ सके।


क्यों ज़रूरी है जाति जनगणना? (Key Arguments of the Book)

पुस्तक में उठाए गए कुछ अहम प्रश्न:

  • जब आर्थिक जनगणना हो सकती है, तो जातिगत क्यों नहीं?

  • 1931 के बाद आज तक जाति आधारित संपूर्ण आंकड़े क्यों उपलब्ध नहीं हैं?

  • आरक्षण, शिक्षा, रोजगार और योजनाओं का लाभ सही वर्ग तक पहुँचा या नहीं — यह कैसे तय होगा?

डॉ. लक्ष्मण यादव का तर्क है कि जाति जनगणना विभाजन नहीं, बल्कि पारदर्शिता का माध्यम है


आलोचनात्मक दृष्टि (Critical View)

जहाँ पुस्तक सामाजिक न्याय की मजबूत वकालत करती है, वहीं कुछ पाठकों को यह लग सकता है कि इसमें भावनात्मक आग्रह अधिक है। हालांकि, यह भावनात्मकता विषय की गंभीरता से उपजी है, न कि किसी उग्र एजेंडे से।


यह पुस्तक किनके लिए है? (Who Should Read This Book)

  • UPSC, SSC, State PCS जैसे परीक्षाओं के अभ्यर्थी

  • समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान और लोक नीति के विद्यार्थी

  • सामाजिक कार्यकर्ता और शोधकर्ता

  • वे पाठक जो भारत की सामाजिक वास्तविकता को गहराई से समझना चाहते हैं


लेखक परिचय: डॉ. लक्ष्मण यादव (About Dr. Lakshman Yadav)

Dr Lakshman Yadav एक समाजशास्त्रीय चिंतक, लेखक और सामाजिक मुद्दों पर मुखर विचारक हैं। उनका लेखन मुख्य रूप से सामाजिक न्याय, पिछड़ा वर्ग, नीति-निर्माण और लोकतंत्र के इर्द-गिर्द केंद्रित रहता है।

डॉ. यादव की विशेषता यह है कि वे अकादमिक ज्ञान को जमीनी सच्चाइयों से जोड़ते हैं। उनका दृष्टिकोण न केवल वैचारिक है, बल्कि अनुभवजन्य भी है। जाति जनगणना उनकी उन्हीं कोशिशों का परिणाम है, जिसमें वे समाज के अदृश्य वर्गों को दृश्य बनाने की मांग करते हैं।


निष्कर्ष (Conclusion)

जाति जनगणना केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि एक सामाजिक विमर्श है। यह पाठक को असहज प्रश्नों से रूबरू कराती है, लेकिन यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। यदि आप भारत के सामाजिक ढांचे, नीति की खामियों और लोकतांत्रिक जवाबदेही को समझना चाहते हैं, तो यह पुस्तक अवश्य पढ़नी चाहिए।

रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐☆ (4/5)
विचारोत्तेजक, तथ्यपूर्ण और समय की मांग


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The book review reflects the author’s personal understanding and interpretation of the book.
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 FAQs – Jaati Jangadna Book Review

1. Jaati Jangadna किताब किसने लिखी है?

Jaati Jangadna किताब डॉ. लक्ष्मण यादव द्वारा लिखी गई है।

2. Jaati Jangadna किताब किस विषय पर आधारित है?

यह किताब भारत में जाति जनगणना, सामाजिक न्याय और नीति निर्माण पर आधारित है।

3. Jaati Jangadna का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इसका मुख्य उद्देश्य जाति आधारित सटीक आंकड़ों की आवश्यकता को समझाना है।

4. क्या Jaati Jangadna राजनीतिक किताब है?

नहीं, यह किताब किसी दल विशेष की नहीं बल्कि सामाजिक और लोकतांत्रिक मुद्दों पर केंद्रित है।

5. जाति जनगणना क्यों जरूरी है?

क्योंकि बिना आंकड़ों के सामाजिक न्याय और योजनाओं का सही लाभ तय नहीं किया जा सकता।

6. Jaati Jangadna किताब किस भाषा में है?

यह किताब हिंदी भाषा में लिखी गई है।

7. Jaati Jangadna किताब कौन पढ़ सकता है?

UPSC, PCS, SSC के छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता और सामान्य पाठक सभी पढ़ सकते हैं।

8. क्या यह किताब UPSC या PCS के लिए उपयोगी है?

हाँ, GS, Essay और Social Justice जैसे विषयों के लिए यह काफी उपयोगी है।

9. Jaati Jangadna किताब में कौन-कौन से मुद्दे उठाए गए हैं?

जाति जनगणना, आरक्षण, सामाजिक असमानता और डेटा आधारित नीति।

10. Dr Lakshman Yadav कौन हैं?

Dr Lakshman Yadav एक सामाजिक चिंतक और लेखक हैं जो सामाजिक न्याय पर लिखते हैं।

11. क्या Jaati Jangadna किताब निष्पक्ष है?

हाँ, लेखक ने तथ्यों और तर्कों के आधार पर विषय को रखा है।

12. क्या यह किताब केवल पिछड़े वर्ग पर केंद्रित है?

नहीं, यह पूरे भारतीय समाज की संरचना पर चर्चा करती है।

13. Jaati Jangadna किताब का नाम क्यों महत्वपूर्ण है?

क्योंकि यह सीधे उस मुद्दे को दर्शाता है जिस पर देश में बहस चल रही है।

14. क्या यह किताब आम पाठक के लिए कठिन है?

नहीं, इसकी भाषा सरल और समझने योग्य है।

15. Jaati Jangadna किताब से क्या सीख मिलती है?

यह सिखाती है कि सामाजिक नीतियाँ आंकड़ों पर आधारित होनी चाहिए।

16. क्या यह किताब सामाजिक विभाजन बढ़ाने की बात करती है?

नहीं, यह पारदर्शिता और न्याय की बात करती है।

17. Jaati Jangadna किताब की सबसे बड़ी खासियत क्या है?

डेटा, इतिहास और वर्तमान नीति का संतुलित विश्लेषण।

18. क्या यह किताब Essay writing के लिए मददगार है?

हाँ, सामाजिक न्याय और लोकतंत्र से जुड़े essays के लिए उपयोगी है।

19. Jaati Jangadna किताब आज के समय में क्यों प्रासंगिक है?

क्योंकि जाति जनगणना आज भी एक बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा है।

20. क्या Jaati Jangadna किताब पढ़नी चाहिए?

अगर आप भारत के सामाजिक ढांचे को समझना चाहते हैं, तो जरूर पढ़नी चाहिए।

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